जब तू ना होगी...................
तू यशोदा, तू देवकी, तू जननी तू ही पालिनी मेरीगिरकर-उठना,रोकर-हसना सब सिखाया तूने
किस चेहरे की तरफ उम्मीद भरी निगाहों से देखूँगा मैं
जब तू ना होगी ज़िंदगी में मेरी........
क्या बचपन ,क्या बुढ़ापा,क्या जवानी मेरी
हर दौर में तेरी ज़रुरत है माँ
किस को खुदा से ऊपर रखूँगा मैं
जब तू ना होगी ज़िंदगी में मेरी........
ये मुमकिन है किसी की गोद को सिरहाना बना लूँगा मैं
प्यार किसी का पा लूँगा मैं
पर क्या मिलेगी मुझे ममता तेरी
जब तू ना होगी ज़िंदगी में मेरी.........
पिता होकर ये हद में होगा मेरी
किसी को बेटा या बेटी कह पाऊँगा मैं
पर मुझे बेटा कहने वाला ना होगा कोई
जब तू ना होगी ज़िंदगी में मेरी........
यूँ तो उम्र काफी हो चली है मेरी
पर आज भी तेरी मोजूदगी,बचपन की याद दिलाती है मुझे
कितना बड़ा हो जाऊँगा मैं
जब तू ना होगी ज़िंदगी में मेरी.........
ये मुमकिन नहीं कोई ईश्वर छीन लेगा तुझे मुझसे
रगो में दौड़ती रहेगी तू लहू बनकर,जिंदा रहेगी तू मुझमें
अपनी साँसों में महसूस करूंगा मोजूदगी तेरी
जब तू ना होगी ज़िंदगी में मेरी...........
Keep Loving Your Mother....So you keep Loving Everything.
Heart Touching...... Superb Sir.
ReplyDeleteDoor ho ya pas sath rahrta hai Ma ka eshas q ki jise jindagi khete hum,vo lavj hai ma
ReplyDeletereally vry touching
Very Very...Nice sir G..
ReplyDeleteThis is one of the best poem stating about the soft and pure nature of mothers. This is the one which has really touched my heart and hope whosoever will read it will like it.
ReplyDeleteYours
Kumar Bruce
Sir Though nt able to feel many of ur thoughts so deeply bt truly tis one stands gud for me too wherein i can nw feel wat it means to be a MAA......
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