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Showing posts from September, 2011

ये जो आदत हो गयी है तेरी......

एक उम्र गुज़ारी अकेले मैंने ना आदत हुई किसी की मुझको पर जबसे आई तू करीब मेरे ना आदत रही अकेले रहने की मुझको यूँ तो आदतें और भी खराब थीं मेरी पर ये जो आदत हो गयी है तेरी...... हर रात जब भी सोया मैं करवटों ने मेरी ना ढूँढा किसी को पर सोने लगी जबसे तू करीब मेरे भर बाहों में तुझे, हो गयी सोने की आदत मुझे यूँ तो आदतें और भी खराब थीं मेरी पर ये जो आदत हो गयी है तेरी...... हर सुबह जब भी जागा मैं उगते सूरज को देखा मैंने पर जबसे जागने लगा मैं साथ तेरे हर सुबह देखने की तुझे, हो गयी आदत मुझे यूँ तो आदतें और भी खराब थीं मेरी पर ये जो आदत हो गयी है तेरी...... हर सफ़र पर चला मैं अकेला बस परछाईं मेरी रही साथ मेरे पर बन गयी जबसे तू मेरी हमसफ़र आदत चलने की हो गयी, हाथों में हाथ डाल तेरे यूँ तो आदतें और भी खराब थीं मेरी पर ये जो आदत हो गयी है तेरी...... थक हार कर लोटता जब घर मैं बना अपनी बाहों का सिरहाना, थोडा सुस्ता लेता मैं पर जबसे रखा सर मेरा तूने गोद में अपनी तेरी गोद को सिरहाना बनाने की हो गयी आदत मुझे यूँ तो आदतें  और भी खराब थीं मेरी पर ये जो आदत हो गयी है तेरी...... जब कभी टूट कर ...

कंकर से शंकर तक ...............

ना कोई जानता था , ना कोई पहचानता था भीड़ में दबा कुचला बेजान सा बेड़ोल बेढंग सा, मैं था पड़ा कंकर था मैं, ना कोई नाम ना निशां था मेरा.... रोज़ महज़ जीने के लिए था लड़ता कभी इधर, कभी उधर धकेला जाता कहीं दफ़न होना निशचित है, मालूम था पर फिर भी जीने की उम्मीद ना छोड़ता था कंकर था मैं, ना कोई नाम ना निशां था मेरा.... सभी जो आस-पास थे मेरे एक-एक कर अस्तित्व अपना खो रहे थे मैं भी नज़र अब आने लगा था मेरा भी वक़्त नज़दीक आने लगा था कंकर था मैं, ना कोई नाम ना निशां था मेरा.... एक रोज़ जब आई बारी मेरी ले जाने वाला देख मुझे चकित था अचंभित हो, थाम लिया उसने हाथो में मुझे शत-शत नमन किया देख मुझे उस ढेर में पड़े कंकर था मैं, ना जाने क्या देख लिया था उसने मुझमें .... शायद बड़े बड़ो से टकराते झूंझते पा लिया था एक आकार मैंने इस बेड़ोल बेढंग से कंकर में ढूँढ लिया कोई आकार उस दिवाने ने कंकर था मैं, ना जाने क्या देख लिया था उसने मुझमें .... रास्तों से उठा कर बिठा दिया था उसने मुझे मंदिर में जो हाथ फेंकते थे मुझे, आज झुक रहे थे मेरे सजदे में कभी जिस भीड़ का हुआ करता था मैं हिस्सा ...