ज़िंदगी मिलेगी ना दोबारा ..............
क्यूँ रातें तेरी जागती रहती हैं क्यूँ दिन तेरे सुकूँ में नहीं हैं किन ख़यालों में खोया रहता है तू क्यूँ आखें तेरी सोती नहीं हैं जी ले ज़िंदगी जी भर के यारा ज़िंदगी मिलेगी ना दोबारा... साहिल पे बैठ कर, करता है किसका इंतज़ार क्यूँ आती लहरों को छूता नहीं है डरता है क्यूँ तू , ज़िंदगी की गहराई से तेरना क्यूँ तू सीखता नहीं है जी ले ज़िंदगी जी भर के यारा ज़िंदगी मिलेगी ना दोबारा... तू नज़रे झुकाए किस आसमा की ओर देखता है क्यूँ आखों में आखें डालता नहीं है सफ़र से पहले ही, क्यूँ लड़खड़ा जाते हैं कदम तेरे क्यूँ इन कदमों को संभालता नहीं है जी ले ज़िंदगी जी भर के यारा ज़िंदगी मिलेगी ना दोबारा... हार के डर से, जीत की उम्मीद छोड़ता है वार सीने पे ना हो, इसलिए पीठ दिखाता है जब एक रोज सामना होना ही है क्यूँ लड़ना सीखता नहीं है जी ले ज़िंदगी जी भर के यारा ज़िंदगी मिलेगी ना दोबारा... अरे एक बार कह कर तो देख ज़िंदगी से अपनी क्या मालूम वो हाथ अपना बढ़ा दे डरता है क्यूँ तू , थामने से कलाई उसकी हो सकता है गले से व...