ये जो आदत हो गयी है तेरी......
एक उम्र गुज़ारी अकेले मैंने
ना आदत हुई किसी की मुझको
पर जबसे आई तू करीब मेरे
ना आदत रही अकेले रहने की मुझको
यूँ तो आदतें और भी खराब थीं मेरी
पर ये जो आदत हो गयी है तेरी......
हर रात जब भी सोया मैं
करवटों ने मेरी ना ढूँढा किसी को
पर सोने लगी जबसे तू करीब मेरे
भर बाहों में तुझे, हो गयी सोने की आदत मुझे
यूँ तो आदतें और भी खराब थीं मेरी
पर ये जो आदत हो गयी है तेरी......
हर सुबह जब भी जागा मैं
उगते सूरज को देखा मैंने
पर जबसे जागने लगा मैं साथ तेरे
हर सुबह देखने की तुझे, हो गयी आदत मुझे
यूँ तो आदतें और भी खराब थीं मेरी
पर ये जो आदत हो गयी है तेरी......
हर सफ़र पर चला मैं अकेला
बस परछाईं मेरी रही साथ मेरे
पर बन गयी जबसे तू मेरी हमसफ़र
आदत चलने की हो गयी, हाथों में हाथ डाल तेरे
यूँ तो आदतें और भी खराब थीं मेरी
पर ये जो आदत हो गयी है तेरी......
थक हार कर लोटता जब घर मैं
बना अपनी बाहों का सिरहाना, थोडा सुस्ता लेता मैं
पर जबसे रखा सर मेरा तूने गोद में अपनी
तेरी गोद को सिरहाना बनाने की हो गयी आदत मुझे
यूँ तो आदतें और भी खराब थीं मेरी
पर ये जो आदत हो गयी है तेरी......
जब कभी टूट कर बिखरता मैं
घर की चार दिवारी में सिमट जाता मैं
पर जबसे दिया तूने अपनी बाहों का सहारा
तेरी बाहों में सिमट जाने की हो गयी आदत मुझे
यूँ तो आदतें और भी खराब थीं मेरी
पर ये जो आदत हो गयी है तेरी......
जब कभी हुआ मन, के देखूं मैं लगता हूँ कैसा
खुद को आईने में देख लिया मैंने
पर जब से कहा तूने, के मैं लगता हूँ अच्छा
तेरी आखों में देख सवरने की हो गयी आदत मुझे
यूँ तो आदतें और भी खराब थीं मेरी
पर ये जो आदत हो गयी है तेरी......
जब कभी बैठा मैं दोस्तों में
सिर्फ उनकी सुनी, ज़िक्र अपना कुछ कर दिया
पर जबसे जाना तुझको, बातें हुईं तुझसे
ज़िक्र तेरा करने की हो गयी आदत मुझे
यूँ तो आदतें और भी खराब थीं मेरी
पर ये जो आदत हो गयी है तेरी......
जब कभी दिल धड़का किसी के लिए
कुछ पढ़ लिया, कोई गीत गुनगुना लिया
पर जबसे लगा बैठे हम दिल तुझसे
खुद लिखने की आदत हो गयी मुझे
यूँ तो आदतें और भी खराब थीं मेरी
पर ये जो आदत हो गयी है तेरी......
फिलहाल कोई डर नहीं, उस उम्र की फ़िक्र है मुझे
गर उम्र मेरी ज्यादा हुई तुझसे
अकेले कैसे गुजरेगी वो उम्र मुझसे
तेरे साथ जो जीने की आदत हो गयी है मुझे
यूँ तो आदतें और भी खराब थीं मेरी
पर ये जो आदत हो गयी है तेरी......
मेरे लिए अपना ख्याल रखना.................
ना आदत हुई किसी की मुझको
पर जबसे आई तू करीब मेरे
ना आदत रही अकेले रहने की मुझको
यूँ तो आदतें और भी खराब थीं मेरी
पर ये जो आदत हो गयी है तेरी......
हर रात जब भी सोया मैं
करवटों ने मेरी ना ढूँढा किसी को
पर सोने लगी जबसे तू करीब मेरे
भर बाहों में तुझे, हो गयी सोने की आदत मुझे
यूँ तो आदतें और भी खराब थीं मेरी
पर ये जो आदत हो गयी है तेरी......
हर सुबह जब भी जागा मैं
उगते सूरज को देखा मैंने
पर जबसे जागने लगा मैं साथ तेरे
हर सुबह देखने की तुझे, हो गयी आदत मुझे
यूँ तो आदतें और भी खराब थीं मेरी
पर ये जो आदत हो गयी है तेरी......
हर सफ़र पर चला मैं अकेला
बस परछाईं मेरी रही साथ मेरे
पर बन गयी जबसे तू मेरी हमसफ़र
आदत चलने की हो गयी, हाथों में हाथ डाल तेरे
यूँ तो आदतें और भी खराब थीं मेरी
पर ये जो आदत हो गयी है तेरी......
थक हार कर लोटता जब घर मैं
बना अपनी बाहों का सिरहाना, थोडा सुस्ता लेता मैं
पर जबसे रखा सर मेरा तूने गोद में अपनी
तेरी गोद को सिरहाना बनाने की हो गयी आदत मुझे
यूँ तो आदतें और भी खराब थीं मेरी
पर ये जो आदत हो गयी है तेरी......
जब कभी टूट कर बिखरता मैं
घर की चार दिवारी में सिमट जाता मैं
पर जबसे दिया तूने अपनी बाहों का सहारा
तेरी बाहों में सिमट जाने की हो गयी आदत मुझे
यूँ तो आदतें और भी खराब थीं मेरी
पर ये जो आदत हो गयी है तेरी......
जब कभी हुआ मन, के देखूं मैं लगता हूँ कैसा
खुद को आईने में देख लिया मैंने
पर जब से कहा तूने, के मैं लगता हूँ अच्छा
तेरी आखों में देख सवरने की हो गयी आदत मुझे
यूँ तो आदतें और भी खराब थीं मेरी
पर ये जो आदत हो गयी है तेरी......
जब कभी बैठा मैं दोस्तों में
सिर्फ उनकी सुनी, ज़िक्र अपना कुछ कर दिया
पर जबसे जाना तुझको, बातें हुईं तुझसे
ज़िक्र तेरा करने की हो गयी आदत मुझे
यूँ तो आदतें और भी खराब थीं मेरी
पर ये जो आदत हो गयी है तेरी......
जब कभी दिल धड़का किसी के लिए
कुछ पढ़ लिया, कोई गीत गुनगुना लिया
पर जबसे लगा बैठे हम दिल तुझसे
खुद लिखने की आदत हो गयी मुझे
यूँ तो आदतें और भी खराब थीं मेरी
पर ये जो आदत हो गयी है तेरी......
फिलहाल कोई डर नहीं, उस उम्र की फ़िक्र है मुझे
गर उम्र मेरी ज्यादा हुई तुझसे
अकेले कैसे गुजरेगी वो उम्र मुझसे
तेरे साथ जो जीने की आदत हो गयी है मुझे
यूँ तो आदतें और भी खराब थीं मेरी
पर ये जो आदत हो गयी है तेरी......
मेरे लिए अपना ख्याल रखना.................
wonderful thought sir.... i just loved it mind blowing
ReplyDeleteTruely amazing & superb thought by you ever i have read.I have no words to say anything or to express my feelings towards this great & dedicated poem for the beautiful beloved or for the LOVE.
ReplyDeleteNow I am sure that in this world LOVE definaltly endures because there are many people who really have depth and truely regard for their love......SALUTING YOU SIR from the bottom of my heart....miss u....
प्रशांत जी,
ReplyDeleteनमस्ते!
खराब आदतों में एक खूबसूरत आदत को शुमार करने की बधाई.
आप मेरे अज़ीज़ हैं इसलिए रश्क करना ना तो वाजिब है ना ही जायज़, पर इतना ज़रूर कहूँगा और आप भी मानते हैं जैसा की कविता से ज़ाहिर है, आप किस्मत वाले हैं. और एक मैं हूँ जिसका बैड लक बदस्तूर जारी है... ब्लॉग पढ़ के देखें! (इस विषय पर फोन पर कोई बात नहीं करूंगा)
भाभी को सादर प्रणाम, वीरांगना को आशीष का आशीष.
आप सभी को एक खुशहाल मुस्तकबिल की दुआ के साथ,
आशीष
--
मैंगो शेक!!!
yakin nahi ata payr lvzo me itna khoobsurat ho sakta hai ki soch te he hum ki har shabd se mohabat ki hai apne.
ReplyDeletesir really me so romantic badi sachi se pyar ko byan kiya hai apne.
Hi Dear,
ReplyDeleteMy day begins and ends with you, my sweetheart. I cannot imagine a day without you by my side. You are my sunshine who makes my everyday look so bright. Thanks, for being my best man. I feel blessed for having found my true love.
urs luv